डीजल कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर कांग्रेस का हमला, सुरजेवाला बोले- किसानों और MSME पर बढ़ेगा बोझ

चंडीगढ़, 12 जून: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Randeep Singh Surjewala ने डीजल खरीद से जुड़े नए प्रावधानों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण किसानों, शहरी मध्यम वर्ग और लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
सुरजेवाला ने जारी बयान में कहा कि सरकार की हालिया व्यवस्था से 200 लीटर से अधिक डीजल खरीदने वाले उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है, जिसका असर कृषि, उद्योग और आम उपभोक्ताओं पर दिखाई देगा।
किसानों पर असर पड़ने का दावा
कांग्रेस नेता का कहना है कि वर्तमान समय में खरीफ फसलों की बुवाई का सीजन चल रहा है और किसानों को सिंचाई तथा कृषि कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में डीजल की आवश्यकता होती है।
उन्होंने दावा किया कि यदि बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने पर अतिरिक्त लागत आती है, तो इसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ेगा और किसानों की आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
मध्यम वर्ग और आवासीय सोसायटियों का मुद्दा भी उठाया
सुरजेवाला ने कहा कि कई शहरों में आवासीय सोसायटियां, अपार्टमेंट और बहुमंजिला इमारतें बिजली कटौती की स्थिति में जनरेटर चलाने के लिए डीजल का उपयोग करती हैं।
उनका आरोप है कि यदि बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने की लागत बढ़ती है, तो इसका असर रखरखाव खर्च पर पड़ेगा और अंततः इसका बोझ आम निवासियों को उठाना पड़ सकता है।
MSME क्षेत्र को लेकर जताई चिंता
कांग्रेस नेता ने लघु एवं मध्यम उद्योगों के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि अनेक औद्योगिक इकाइयां बिजली आपूर्ति में बाधा आने पर डीजल जनरेटर का उपयोग करती हैं।
उन्होंने दावा किया कि डीजल महंगा होने की स्थिति में उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे उत्पादों की कीमतों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। उनके अनुसार इसका असर उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों पर दिखाई दे सकता है।
केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सुरजेवाला ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई से आम जनता प्रभावित हो रही है। उन्होंने तेल कंपनियों के मुनाफे और ईंधन मूल्य निर्धारण को लेकर भी सवाल उठाए।
हालांकि केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से इस विषय पर अलग दृष्टिकोण रखा जाता रहा है। सरकार का कहना रहा है कि ईंधन मूल्य निर्धारण और वितरण संबंधी फैसले विभिन्न प्रशासनिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।



