Girija Amma Story: बच्चों के एक-एक रुपये से जुटाए 40 लाख, ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने सराहा अनोखा अभियान
तमिलनाडु की शिक्षिका गिरिजा अम्मा ने छात्रों में जगाई देशभक्ति की भावना, सैनिकों के सम्मान में शुरू की पहल बनी प्रेरणा का उदाहरण

नई दिल्ली, 31 मई 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड में तमिलनाडु की शिक्षाविद् गिरिजा अम्मा का उल्लेख करते हुए उनके प्रयासों को देश के लिए प्रेरणादायक बताया। पीएम मोदी ने कहा कि गिरिजा अम्मा ने छात्रों में राष्ट्रसेवा और सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने के लिए जो पहल की, वह समाज के लिए एक मिसाल है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल ही में उनकी मुलाकात गिरिजा अम्मा से हुई, जिनसे वे वर्षों पहले भी मिल चुके थे। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने गिरिजा अम्मा के उस अभियान की चर्चा की, जिसके जरिए छात्रों के छोटे-छोटे योगदान से सैनिकों के लिए लाखों रुपये की राशि एकत्रित की गई।
कौन हैं गिरिजा अम्मा?
गिरिजा अम्मा तमिलनाडु के नागरकोइल से जुड़ी एक प्रतिष्ठित शिक्षिका और शिक्षा प्रबंधक हैं। वे कई शैक्षणिक संस्थानों का संचालन करती हैं और शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती हैं। उनके नेतृत्व में संचालित विद्यालयों में हजारों छात्र अध्ययन करते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के साथ-साथ वे विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा भाव विकसित करने के प्रयासों के लिए भी पहचान रखती हैं।
कैसे जुटे 40 लाख रुपये?
गिरिजा अम्मा ने अपने स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को देश के सैनिकों के सम्मान में एक विशेष अभियान से जोड़ा। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे प्रतिदिन केवल एक रुपये का योगदान करें। इस छोटी राशि को नियमित रूप से जमा करने का परिणाम यह हुआ कि एक वर्ष के भीतर लाखों रुपये का कोष तैयार हो गया। हजारों छात्रों की भागीदारी से करीब 40 लाख रुपये की राशि एकत्रित हुई, जिसे सैनिकों के कल्याण के उद्देश्य से समर्पित किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पहल को सामूहिक शक्ति और देशभक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
शिक्षा और संस्कार का अनोखा संगम
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि गिरिजा अम्मा का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं बल्कि छात्रों को जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। उनके प्रयासों से विद्यार्थियों में समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध विकसित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की पहल बच्चों में सेवा भावना, अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी की सोच को मजबूत करती है।
हिंदू विद्यालय नेटवर्क की उपलब्धि
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी उल्लेख किया कि चेन्नई का एक प्रमुख हिंदू विद्यालय हाल ही में अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे कर चुका है। उन्होंने विद्यालय परिवार, शिक्षकों और छात्रों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।
‘मन की बात’ में बिहार का भी जिक्र
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों की विशेषताओं और स्थानीय उत्पादों का भी उल्लेख किया। बिहार के पारंपरिक पेय सत्तू और प्रसिद्ध जर्दालु आम की चर्चा ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री के इस उल्लेख के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे राज्य की समृद्ध विरासत और स्थानीय उत्पादों को देशभर में नई पहचान मिलेगी।
क्या है इस पहल का प्रभाव?
- विद्यार्थियों में देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत हुई।
- सैनिकों के सम्मान के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ी।
- छोटे योगदान से बड़े बदलाव की सोच को बढ़ावा मिला।
- शिक्षा संस्थानों में मूल्य आधारित शिक्षा को नई दिशा मिली।
- समाज में सामूहिक भागीदारी और जनसहयोग का सकारात्मक संदेश गया।



