गुरु अमर दास जी की शिक्षाएं आज भी समाज को दिखा रही नई राह, लुधियाना में प्रकाश पर्व समारोह में बोले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
सेवा, समानता और मानवता के संदेश को अपनाने का आह्वान, गुरुद्वारा विकास के लिए 5 लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा

चंडीगढ़/लुधियाना, 7 जून। हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने कहा कि सिखों के तीसरे गुरु Guru Amar Das का जीवन त्याग, सेवा, समर्पण और सामाजिक समानता का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि गुरु जी की शिक्षाएं आज भी मानवता को भाईचारे, सामाजिक समरसता और जनकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
लुधियाना में आयोजित श्री गुरु अमर दास जी के प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में निकाले गए 9वें विशाल नगर कीर्तन एवं कीर्तन समागम में मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए गुरुद्वारा प्रबंधन के लिए 5 लाख रुपये की सेवा राशि देने की घोषणा की। साथ ही भविष्य में धार्मिक स्थल से जुड़े विकास कार्यों में हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिया।
सामाजिक सुधार के अग्रदूत थे गुरु अमर दास जी
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु अमर दास जी ने अपने समय में समाज में फैली जातिगत भेदभाव, ऊंच-नीच और सामाजिक असमानताओं के खिलाफ मजबूत आवाज उठाई। उन्होंने “पहले पंगत, पीछे संगत” की परंपरा के माध्यम से समानता और भाईचारे का संदेश दिया, जिसने समाज में नई चेतना पैदा की।
उन्होंने कहा कि गुरु जी का यह संदेश केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।
महिला सशक्तिकरण में भी निभाई अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु अमर दास जी ने महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। उन्होंने सती प्रथा जैसी अमानवीय कुरीतियों का विरोध किया तथा विधवा पुनर्विवाह को समर्थन दिया। साथ ही महिलाओं को सामाजिक बंधनों से मुक्त होकर सम्मानपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा दी।
वर्तमान समय में भी प्रासंगिक हैं गुरु जी की शिक्षाएं
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और भौतिकवाद की दौड़ के कारण समाज तनाव, प्रतिस्पर्धा और मानसिक अशांति जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे दौर में गुरु अमर दास जी की शिक्षाएं और आनंद साहिब की वाणी लोगों को आत्मिक शांति, संतोष और सकारात्मक जीवन का मार्ग दिखाती हैं।
पंजाब-हरियाणा की साझा आध्यात्मिक विरासत
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और हरियाणा केवल पड़ोसी राज्य ही नहीं, बल्कि दोनों की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ें भी एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। सिख गुरुओं की पावन स्मृतियां हरियाणा की धरती से भी जुड़ी हैं और राज्य सरकार इस विरासत को संरक्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
सिख विरासत संरक्षण के लिए कई योजनाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र और हरियाणा सरकार सिख इतिहास और गुरुओं की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के विकास, स्मारकों के निर्माण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार के लिए अनेक पहल की गई हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा सिख श्रद्धालुओं के लिए विशेष यात्रा योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों और सिख विरासत स्थलों के संरक्षण एवं विकास पर भी कार्य जारी है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दिए निर्देश
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गुरुद्वारे के आसपास श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए और आश्वासन दिया कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
समारोह में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, रागी जत्थे, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और श्रद्धालु मौजूद रहे। पूरे वातावरण में भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष उत्साह देखने को मिला।



