हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष का युवाओं को संदेश: नौकरी तलाशने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें

चंडीगढ़, 14 सितंबर। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने युवाओं से देश को विकसित, आत्मनिर्भर और समावेशी बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया है। फरीदाबाद स्थित जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए के छठवें दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि बदलती तकनीकी दुनिया में युवाओं को केवल रोजगार पाने की सोच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नए अवसर पैदा करने और समाज के विकास में योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
राज्यपाल ने आचार्य जगदीश चंद्र बोस की वैज्ञानिक सोच और जिज्ञासा को आज के तकनीकी दौर के लिए बेहद प्रासंगिक बताते हुए विद्यार्थियों से नवाचार और अनुसंधान की संस्कृति को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसी तकनीकों के विस्तार के दौर में वैज्ञानिक सोच युवाओं की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
3,877 विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां
दीक्षांत समारोह में वर्ष 2024 और 2025 में अपने पाठ्यक्रम पूरे करने वाले कुल 3,877 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें 2,079 छात्र और 1,798 छात्राएं शामिल हैं।
उपाधि प्राप्त करने वालों में 68 शोधार्थी भी शामिल रहे, जिनमें 46 महिला शोधकर्ता हैं। समारोह में विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मेडल देकर सम्मानित किया गया।
वर्ष 2024 और 2025 के लिए दो-दो विद्यार्थियों को गवर्नर-चांसलर मेडल और चीफ मिनिस्टर मेडल प्रदान किए गए। इसके अलावा 19 विद्यार्थियों को उनके शानदार अकादमिक प्रदर्शन के लिए वाइस-चांसलर मेडल से सम्मानित किया जाएगा।
विधि रैना और हर्षिका वत्स को गवर्नर-चांसलर मेडल
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों में बीटेक कंप्यूटर इंजीनियरिंग की विधि रैना और हर्षिका वत्स को गवर्नर-चांसलर मेडल से सम्मानित किया गया।
वहीं बीटेक रोबोटिक्स एंड एआई के राम सेवक तथा बीटेक आईटी की आकृति मित्तल को चीफ मिनिस्टर मेडल प्रदान किया गया।
समारोह में विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों को भी बधाई दी गई।
रिसर्च के लिए 25 लाख रुपये देने का ऐलान
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने विश्वविद्यालय में अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अपने विवेकाधीन फंड से 25 लाख रुपये का अनुदान देने की घोषणा की।
इस राशि का एक हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की सहायता के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे ऐसे छात्रों को उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त सहयोग मिलने की उम्मीद है।



