IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, हरियाणा सरकार के पूर्व अधीक्षक नरेश कुमार गिरफ्तार

चंडीगढ़, 11 जून। बहुचर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक वित्तीय अनियमितता मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा के विकास एवं पंचायत निदेशक कार्यालय के तत्कालीन अधीक्षक नरेश कुमार को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने यह गिरफ्तारी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत चल रही जांच के दौरान की है।
ईडी के अनुसार यह मामला सरकारी विभागों और अन्य संस्थानों के खातों से करोड़ों रुपये के कथित गबन और उसके बाद धन को विभिन्न माध्यमों से खपाने से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।
645 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच
जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और कुछ निजी शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े बैंक खातों से लगभग 645 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। ईडी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क में कई व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका सामने आई है। एजेंसी के अनुसार मामले में पहले से गिरफ्तार आरोपियों के साथ मिलकर धन के प्रवाह और उसके उपयोग की विस्तृत जांच की जा रही है।
नरेश कुमार पर क्या हैं आरोप?
ईडी का आरोप है कि नरेश कुमार को एक कथित शेल कंपनी के माध्यम से धनराशि प्राप्त हुई थी। जांच में उनके और उनके परिवार से जुड़े बैंक खातों में लगभग 1.20 करोड़ रुपये की संदिग्ध रकम पहुंचने के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपी पर कथित तौर पर धन के हस्तांतरण, लेन-देन और उसे छिपाने की प्रक्रिया में शामिल होने के आरोप हैं। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
शेल कंपनियों के जरिए चला कथित नेटवर्क
जांच के दौरान कई ऐसी कंपनियों का नाम सामने आया है, जिन्हें ईडी शेल कंपनियां मान रही है। एजेंसी के मुताबिक इन कंपनियों के माध्यम से धनराशि को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किया गया और बाद में कई स्तरों पर उसका लेन-देन किया गया। ईडी का दावा है कि कुछ मामलों में धनराशि ज्वेलर्स और अन्य व्यावसायिक खातों तक भी पहुंची, जहां से नकदी के रूप में लेन-देन किए जाने की आशंका है।
अदालत ने ईडी हिरासत में भेजा
गिरफ्तारी के बाद नरेश कुमार को विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 14 जून 2026 तक ईडी रिमांड पर भेज दिया है, ताकि एजेंसी उनसे पूछताछ कर मामले के अन्य पहलुओं की जांच कर सके। इससे पहले इस मामले में कथित रूप से जुड़े कई अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला सरकारी और संस्थागत खातों से बड़ी राशि के कथित गबन, फर्जी कंपनियों के उपयोग, बैंकिंग चैनलों के माध्यम से धन के हस्तांतरण और उसके बाद कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां धन के वास्तविक लाभार्थियों, निवेशों और संपत्तियों की भी जांच कर रही हैं।



