हरियाणा के कारोबार को मिलेगा ब्रिटेन का नया बाजार! CETA से टेक्सटाइल, फुटवियर और इंजीनियरिंग सेक्टर को बड़ी उम्मीद

चंडीगढ़, 14 सितंबर। भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता यानी CETA हरियाणा के लिए अंतरराष्ट्रीय कारोबार के नए रास्ते खोल सकता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस समझौते से प्रदेश के टेक्सटाइल, फुटवियर, रत्न एवं आभूषण और इंजीनियरिंग जैसे प्रमुख उद्योगों को ब्रिटेन के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है।
गुरुग्राम में आयोजित ‘हरियाणा-यूके CETA ट्रेड ब्रिज : अनलॉकिंग ग्लोबल अपॉर्च्युनिटीज फॉर हरियाणा’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि CETA को केवल व्यापार समझौते के रूप में नहीं, बल्कि निवेश, तकनीक, रोजगार और वैश्विक साझेदारी के नए माध्यम के तौर पर देखना चाहिए।
कार्यक्रम का आयोजन यूके हाई कमीशन के सहयोग से किया गया। इस दौरान विदेश समन्वय विभाग का लोगो भी लॉन्च किया गया।
युवाओं और MSME को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा के युवाओं, किसानों, छोटे और मध्यम उद्यमों तथा स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में CETA महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उनके मुताबिक प्रदेश के उद्यमियों को वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनाने और स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने भारत और ब्रिटेन के संबंधों को लंबे समय से चली आ रही साझेदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार और मजबूत जनसंपर्क पर आधारित बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूके में रह रहे हरियाणवी परिवारों और भारतीय मूल के लोगों ने भी वहां के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
2047 तक विकसित भारत के साथ हरियाणा का बड़ा आर्थिक लक्ष्य
नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। इसी व्यापक विजन के अनुरूप हरियाणा ने देश की अर्थव्यवस्था में एक ट्रिलियन डॉलर का योगदान देने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 1 नवंबर को हरियाणा अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे करने जा रहा है। उन्होंने प्रदेश की आर्थिक यात्रा में किसानों, श्रमिकों और उद्यमियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
2027 में फिर होगा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट
हरियाणा सरकार अगले वर्ष 5 से 7 अप्रैल 2027 तक ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027’ आयोजित करने की तैयारी कर रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार वर्ष 2016 में हुए निवेश सम्मेलन में करीब 6.41 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। अब सरकार अगले चरण में वैश्विक निवेश को और गति देने की तैयारी कर रही है।
इसके लिए देश के सात प्रमुख शहरों के अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, दावोस, जर्मनी, यूके, ब्राजील, चिली और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक केंद्रों में रोड शो आयोजित किए जाएंगे।
मुंबई में 66 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने बताया कि 23 और 24 अगस्त को मुंबई से ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ अंतरराष्ट्रीय आउटरीच अभियान शुरू किया गया था। मुंबई में 17 कंपनियों के साथ 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू हुए।
इस अभियान के दौरान 200 से अधिक प्रमुख कारोबारी नेताओं, उद्यमियों और हरियाणवी डायस्पोरा के सदस्यों के साथ भी संवाद किया गया।
भविष्य के उद्योगों के लिए 10 नई क्षेत्रीय नीतियां
राज्य सरकार ने भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए 10 सेक्टर-स्पेसिफिक पॉलिसी लागू की हैं।
इनका फोकस मुख्य रूप से—
- सेमीकंडक्टर
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- डेटा सेंटर
- मेडिकल डिवाइस
- ऑटोमोबाइल
- इलेक्ट्रिक वाहन
- एग्रीबिजनेस
- ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर
जैसे क्षेत्रों पर है।
सरकार ने वर्ष 2030-31 तक 5 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश आकर्षित करने और 10 लाख से अधिक रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक इन नीतियों की शुरुआत के पहले ही दिन करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये के 110 एमओयू हुए, जिनमें 24,350 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश शामिल था।
MSME और निर्यात को बढ़ाने की नई रणनीति
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में छोटे और मध्यम कारोबारियों को मजबूत करने तथा निर्यात बढ़ाने के लिए 60 परिवर्तनकारी पहल की गई हैं।
फरवरी 2019 में पहली MSME नीति लागू होने के बाद प्रदेश में 15 लाख से ज्यादा MSME का औपचारिक पंजीकरण हुआ है।
अब सरकार ने ‘हरियाणा प्रोग्रेसिव MSME एवं एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2026’ पेश की है। इसके तहत 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करने, 5 लाख से ज्यादा नए रोजगार पैदा करने और प्रदेश के निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
गुरुग्राम बना वैश्विक कारोबार का प्रमुख केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के केवल करीब 2 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद हरियाणा ने देश की प्रमुख गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाई है।
ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और कृषि सहित कई क्षेत्रों में प्रदेश ने अपनी क्षमता साबित की है। वहीं गुरुग्राम देश के प्रमुख कारोबारी, तकनीकी और वैश्विक सेवा केंद्रों में शामिल हो चुका है।
‘गो ग्लोबल’ विजन के तहत काम कर रहा हरियाणा
नायब सैनी ने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के तेजी से विस्तार के बीच हरियाणा ने ‘गो ग्लोबल’ विजन को अपनाया है।
भारत-यूके CETA को इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2020 में गठित विदेश सहयोग विभाग अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
मुख्यमंत्री ने वैश्विक साझेदारों और निवेशकों से इस विभाग की सेवाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।
गीता जयंती महोत्सव में आने का निमंत्रण
व्यापारिक चर्चा के बीच मुख्यमंत्री ने यूके के प्रतिनिधियों और अन्य वैश्विक साझेदारों को अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव-2026 में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।
उन्होंने हरियाणा को भगवान श्रीकृष्ण की कर्मभूमि और गीता की धरती बताते हुए कहा कि प्रदेश की यात्रा केवल औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत भी दुनिया को आकर्षित करती है।
राव नरबीर सिंह ने दिया निवेशकों को खुला न्योता
हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि हरियाणा-यूके ट्रेड ब्रिज दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा और तकनीकी सहयोग को नई दिशा दे सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ कारोबार का आंकड़ा बढ़ाना नहीं है, बल्कि निवेश के साथ तकनीकी साझेदारी, रोजगार और वैश्विक बाजार तक स्थानीय उद्योगों की पहुंच सुनिश्चित करना है।
यूके के निवेशकों और कंपनियों को हरियाणा में निवेश का संदेश देते हुए उन्होंने कहा— “कम टू हरियाणा, इन्वेस्ट इन हरियाणा, पार्टनर विद हरियाणा।”
ब्रिटिश उप उच्चायुक्त ने बताई सहयोग की संभावनाएं
ब्रिटिश उप उच्चायुक्त (चंडीगढ़) अल्बा स्मेरिग्लियो ने भारत-यूके CETA को दोनों पक्षों के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर बताया।
उन्होंने कहा कि हरियाणा की मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, टेक्नोलॉजी और सर्विस सेक्टर की ताकत यूके की उन्नत तकनीक, वित्तीय सेवाओं, शिक्षा, अनुसंधान और इनोवेशन क्षमता के साथ बेहतर तालमेल बना सकती है।
उन्होंने मानेसर, फरीदाबाद, गुरुग्राम और पानीपत जैसे औद्योगिक केंद्रों को यूके के साथ सहयोग बढ़ाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
दो महीने में CETA को जमीन पर उतारने की कोशिश
हरियाणा विदेश सहयोग विभाग में मुख्यमंत्री के सलाहकार पवन चौधरी ने कहा कि 15 जुलाई को CETA लागू होने के बाद राज्य सरकार का फोकस इसे वास्तविक निर्यात ऑर्डर, निवेश और रोजगार के अवसरों में बदलने पर है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा की अर्थव्यवस्था करीब 154 अरब डॉलर की है और राज्य लगभग 11 प्रतिशत की विकास दर से आगे बढ़ रहा है।
उनके अनुसार प्रदेश का निर्यात वर्ष 2019-20 के करीब 12 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 19 अरब डॉलर तक पहुंच गया। राज्य में 12,271 स्टार्टअप पंजीकृत हैं, जिनमें 11,500 से अधिक को DPIIT और Startup India के तहत मान्यता प्राप्त है।
प्रदर्शनी में दिखी हरियाणा और यूके की औद्योगिक क्षमता
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ब्रिटिश उप उच्चायुक्त के साथ विभिन्न उत्पादों और तकनीकों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
प्रदर्शनी में कृषि उत्पादों के साथ टेलीकॉम उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहन और आधुनिक औद्योगिक तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। इस दौरान रेंज रोवर, टाटा और महिंद्रा के इलेक्ट्रिक वाहनों तथा JCB के उत्पादों के बारे में भी जानकारी ली गई।
हरियाणा में काम कर रही यूके की कंपनियों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में हरियाणा में पहले से कारोबार कर रही यूके की कंपनियों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए।
HSBC, JCB, Radio Design और University of Southampton से जुड़े प्रतिनिधियों ने प्रदेश में काम करने के अनुभव, उपलब्ध कारोबारी अवसरों और स्थानीय प्रतिभा के बारे में जानकारी दी।
इन अनुभवों ने यह संकेत दिया कि हरियाणा और यूके के बीच व्यापार के साथ-साथ शिक्षा, रिसर्च, तकनीक और कौशल विकास में भी सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।



