हरियाणा में रिसर्च और इनोवेशन को मिलेगा नया आयाम, CM नायब सैनी ने 20 करोड़ के राज्य अनुसंधान कोष को दी मंजूरी

चंडीगढ़ | 14 जुलाई : हरियाणा सरकार ने राज्य को अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को ‘विजन-2047’ के तहत उच्च शिक्षा विभाग और राज्य के कुलपतियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए 20 करोड़ रुपये के ‘हरियाणा राज्य अनुसंधान कोष’ को मंजूरी दी। इस कोष के माध्यम से राज्य के 27 उच्च शिक्षण संस्थानों की 90 शोध परियोजनाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को केवल डिग्री देने वाले संस्थानों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें समाज और राज्य की वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजने वाले नवाचार केंद्रों के रूप में विकसित करना है।
कृषि से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक होगा शोध
मुख्यमंत्री के अनुसार स्वीकृत शोध परियोजनाएं कृषि, भूजल संरक्षण, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सेवाएं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्रामीण विकास, औद्योगिक नवाचार और समावेशी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर आधारित हैं।
उन्होंने कहा कि शोध का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब उसका लाभ किसानों, उद्योगों और आम नागरिकों तक पहुंचे। शोध को प्रयोगशालाओं से निकालकर तकनीक, स्टार्टअप, पेटेंट और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं में बदलना समय की जरूरत है।
छात्राओं की शिक्षा और आधुनिक कॉलेजों पर भी फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने अपना वादा पूरा करते हुए राज्य में छात्राओं के लिए 20 किलोमीटर की परिधि के भीतर कॉलेजों की उपलब्धता सुनिश्चित की है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा मिल रही है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य के प्रत्येक जिले में मॉडल संस्कृति कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही आधुनिक तकनीकों की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए स्वायत्त AI डिजिटल कॉलेज भी शुरू किए जाएंगे।
पेटेंट, प्लेसमेंट और स्टार्टअप को मिलेगा प्रोत्साहन
नायब सिंह सैनी ने बताया कि शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार 50 हजार रुपये तक के पेटेंट पंजीकरण शुल्क की प्रतिपूर्ति करेगी। इसके अलावा 10 करोड़ रुपये का ‘उच्च शिक्षा गुणवत्ता एवं अनुसंधान उत्कृष्टता कोष’ भी बनाया गया है।
छात्रों को इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए एक सिंगल विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। वहीं, ‘नीव पोर्टल’ के माध्यम से राज्य के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध, पेटेंट, स्टार्टअप, प्लेसमेंट और विद्यार्थियों के प्रदर्शन की डिजिटल निगरानी की जाएगी।



