Chandigarh

रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा: राज्यपाल असीम कुमार घोष

‘युवा संगम’ कार्यक्रम में त्रिपुरा के छात्रों से संवाद, विकसित भारत 2047 के लिए उद्यमिता और नवाचार पर दिया जोर

चंडीगढ़: हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने युवाओं से नौकरी तलाशने की मानसिकता से आगे बढ़कर रोजगार सृजक बनने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि देश के युवा अपनी प्रतिभा, नवाचार और उद्यमशीलता के बल पर न केवल अपना भविष्य संवार सकते हैं, बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं।

राज्यपाल लोक भवन में आयोजित ‘युवा संगम कार्यक्रम’ के दौरान त्रिपुरा से आए छात्र प्रतिनिधिमंडल को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना है।

विकसित भारत के सपने में युवाओं की अहम भूमिका

राज्यपाल ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की ऊर्जा, कौशल और नवाचार की सोच सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें उद्यमिता तथा स्टार्टअप के क्षेत्र में उपयोग करने की अपील की। उनके अनुसार, आज का युवा यदि रोजगार लेने के बजाय रोजगार देने की सोच विकसित करे तो देश की आर्थिक ताकत कई गुना बढ़ सकती है।

स्टार्टअप और नवाचार को अपनाने का संदेश

हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोषप्रो. घोष ने कहा कि भारतीय युवाओं में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता मौजूद है। उन्होंने छात्रों को तकनीक आधारित नवाचार, शोध और स्टार्टअप संस्कृति को अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि नए विचार ही भविष्य की अर्थव्यवस्था को दिशा देंगे। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत बनाने के लिए युवाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे आना होगा।

‘युवा संगम’ से बढ़ेगी सांस्कृतिक एकता

राज्यपाल ने ‘युवा संगम कार्यक्रम’ को राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि जब देश के अलग-अलग राज्यों के युवा एक-दूसरे से मिलते हैं, तो वे केवल अनुभव साझा नहीं करते, बल्कि संस्कृतियों और विचारों का आदान-प्रदान भी करते हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा और हरियाणा भले ही भौगोलिक रूप से दूर हों, लेकिन दोनों राज्यों की पहचान साहस, मेहनत और देशभक्ति की भावना से जुड़ी हुई है।

हरियाणा और त्रिपुरा की विशेषताओं का किया उल्लेख

अपने संबोधन में राज्यपाल ने त्रिपुरा की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं की सराहना की। वहीं हरियाणा को सैनिकों, खिलाड़ियों, किसानों और श्रीमद्भगवद्गीता की भूमि के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ इसी भावना को मजबूत करता है।

छात्रों से किया सीधा संवाद

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ संवाद करते हुए अपने अनुभव साझा किए और युवाओं के सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने विश्वास जताया कि देश के युवा अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर भारत को वैश्विक नेतृत्व की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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