हरियाणा में प्राकृतिक खेती को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन, सरकार लाएगी नई नीति
जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को 5 साल तक प्रति एकड़ 10 हजार रुपये सहायता, 800 एकड़ जमीन होगी आरक्षित

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य में पंचायतों और कृषि विभाग की जमीनों पर भी प्राकृतिक खेती को प्राथमिकता देने के लिए विशेष नीति तैयार की जाएगी। सरकार का उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से हटाकर टिकाऊ और स्वास्थ्य आधारित कृषि प्रणाली की ओर प्रोत्साहित करना है।
मुख्यमंत्री कुरुक्षेत्र में आयोजित कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और क्लस्टर निर्माण योजना के तहत किया गया। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा भी मौजूद रहे।
प्राकृतिक खेती करने वालों को आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि APEDA से प्रमाणित प्राकृतिक एवं जैविक खेती करने वाले किसानों को पांच वर्षों तक प्रति वर्ष 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अलावा जैविक खेती के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी को अधिकृत संस्था बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर कीमत मिलने में मदद मिलेगी।
मंडियों में अलग व्यवस्था और लैब की सुविधा
राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए विशेष इंतजाम करने का भी फैसला लिया है। पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल की मंडियों में जैविक उत्पाद बेचने के लिए अलग स्थान उपलब्ध करवाए जाएंगे। इसके साथ ही परीक्षण प्रयोगशालाएं और एपीडा से मान्यता प्राप्त प्रमाणन केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे, ताकि किसानों को अपनी उपज की गुणवत्ता प्रमाणित करवाने में आसानी हो सके।
कुरुक्षेत्र में शुरू होगी स्मार्ट एग्रीकल्चर योजना
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले में 2 हजार एकड़ क्षेत्र में “स्मार्ट एग्रीकल्चर” योजना शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत आधुनिक तकनीकों के साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि यदि इस परियोजना के दौरान किसी प्रकार का नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई राज्य सरकार करेगी। इसके अलावा मोरनी ब्लॉक को पूर्ण रूप से प्राकृतिक और जैविक खेती आधारित क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई गई है।
दो लाख किसानों ने कराया पंजीकरण
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में प्राकृतिक खेती योजना शुरू की थी। इसके लिए विशेष पोर्टल बनाया गया, जिस पर अब तक करीब 2 लाख किसानों ने लगभग 3 लाख एकड़ भूमि का पंजीकरण कराया है। सरकार के अनुसार, 44 हजार से अधिक एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती के लिए करीब 24 हजार किसानों का सत्यापन भी किया जा चुका है। वहीं वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में 20 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की गई।
आचार्य देवव्रत ने रासायनिक खेती पर जताई चिंता
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक कृषि अब समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और गंभीर बीमारियां भी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि केवल रासायनिक खाद बढ़ाने से उत्पादन में स्थायी सुधार संभव नहीं है। मृदा की उर्वरता बनाए रखने और स्वास्थ्यवर्धक खाद्यान्न उत्पादन के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना जरूरी है।



