हरियाणा में उच्च शिक्षा को मिलेगा नया आयाम, कौशल आधारित शिक्षा पर जोर; बोले शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा

चंडीगढ़/पलवल। हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने कहा कि बदलते समय में शिक्षा को कौशल और उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल डिग्री नहीं, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार के लिए आवश्यक कौशल भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
पलवल स्थित श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय (SVSU) में हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के तत्वावधान में आयोजित ‘उच्च शिक्षा में कौशल-आधारित पाठ्यक्रम एवं माइक्रो क्रेडेंशियल’ विषयक कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए शिक्षा मंत्री ने यह बात कही।
NEP-2020 को धरातल पर लागू करने पर जोर
महीपाल ढांडा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 ने उच्च शिक्षा को अधिक लचीला, आधुनिक और रोजगारोन्मुख बनाया है। अब आवश्यकता इस बात की है कि इन प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
उन्होंने कहा कि कौशल आधारित शिक्षा को सभी विश्वविद्यालयों में समाहित करने से हरियाणा की उच्च शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
विश्वविद्यालयों से मांगी प्रगति रिपोर्ट
शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और अकादमिक प्रतिनिधियों से कौशल आधारित कार्यक्रमों और माइक्रो क्रेडेंशियल्स पर किए गए कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने संस्थानों से इस दिशा में प्रगति रिपोर्ट भी मांगी और विद्यार्थियों को रोजगार के अनुकूल शिक्षा उपलब्ध कराने पर बल दिया।
कॉन्फ्रेंस रूम का उद्घाटन, न्यूजलेटर का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने विश्वविद्यालय के नव निर्मित कॉन्फ्रेंस रूम का उद्घाटन किया और ‘कौशल संवाद’ न्यूजलेटर का विमोचन भी किया। इसके अलावा उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
शिक्षा जगत की प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
कार्यशाला में मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा, श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति और अकादमिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।



