IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़े 645 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में CBI की बड़ी कार्रवाई, हरियाणा के IAS अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी
सरकारी फंड के कथित गबन की जांच तेज, चंडीगढ़ और पंचकूला में कई स्थानों पर तलाशी

चंडीगढ़। IDFC फर्स्ट बैंक में जमा सरकारी खातों से जुड़े 645 करोड़ रुपये के कथित गबन मामले में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शनिवार को चंडीगढ़ और पंचकूला में हरियाणा कैडर के कुछ वरिष्ठ IAS अधिकारियों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के तहत की गई। हालांकि देर शाम तक CBI की ओर से तलाशी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।
दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही एजेंसी
जांच एजेंसियों के मुताबिक तलाशी के दौरान विभिन्न दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड जुटाए गए हैं। इनकी जांच कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सरकारी फंड के कथित ट्रांजैक्शन में किन-किन व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका रही।
सूत्रों का कहना है कि जांच का फोकस उन अधिकारियों पर भी है जिनका संबंध अतीत में Haryana Power Generation Corporation Limited से रहा है।
सरकार की मंजूरी के बाद बढ़ी जांच
बताया जा रहा है कि हरियाणा सरकार ने कुछ माह पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए आवश्यक मंजूरी प्रदान की थी। इसके बाद जांच एजेंसियों ने मामले की पड़ताल को और विस्तार दिया।
यह प्रावधान सरकारी अधिकारियों द्वारा अपने आधिकारिक कार्यों के दौरान लिए गए निर्णयों की जांच से पहले सक्षम प्राधिकरण की अनुमति की आवश्यकता से जुड़ा है।
विजिलेंस जांच से CBI तक पहुंचा मामला
मामले की शुरुआत पंचकूला स्थित राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी से हुई थी। बाद में जांच CBI को सौंप दी गई, जिसके बाद एजेंसी की आर्थिक अपराध शाखा ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दोबारा दर्ज किया।
ED भी कर रही समानांतर जांच
इस कथित वित्तीय घोटाले की जांच में Enforcement Directorate (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर रही है। हाल ही में एजेंसी ने रियल एस्टेट कारोबारी Vikram Wadhwa को गिरफ्तार किया था।
ED का आरोप है कि सरकारी फंड के कथित गबन से जुड़े धन को विभिन्न माध्यमों से ट्रांसफर और निवेश किया गया। एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और कुछ अन्य संस्थाओं से जुड़े खातों में वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
शेल कंपनियों के नेटवर्क की जांच
जांच एजेंसियों को संदेह है कि कथित तौर पर कुछ शेल कंपनियों के माध्यम से धन को विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया गया और बाद में अन्य क्षेत्रों में निवेश किया गया। इस मामले में कई वित्तीय लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित ट्रांजैक्शन में किन व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका रही तथा धन का अंतिम उपयोग कहां हुआ।
पूर्व वित्त निदेशक की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी कार्रवाई
इस मामले में हाल ही में Amit Diwan की गिरफ्तारी के बाद जांच को और गति मिली है। जांच एजेंसियां कथित वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और संबंधित कंपनियों के बीच हुए ट्रांजैक्शनों की पड़ताल कर रही हैं।



