Mango Mela 2026: 200 से ज्यादा आम की किस्मों ने खींचा ध्यान, मंत्री श्याम सिंह राणा बोले- किसान ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत

चंडीगढ़/कुरुक्षेत्र: हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के लाडवा स्थित उप-उष्णकटिबंधीय फल केंद्र में आयोजित तीन दिवसीय 8वें मैंगो मेले का समापन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा की मौजूदगी में हुआ। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल आम की विभिन्न किस्मों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, नवाचार और हरियाणा की कृषि क्षमता का उत्सव है।
मंत्री ने कहा कि देश की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की असली ताकत गांव, किसान और कृषि क्षेत्र हैं। किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और संगठित कृषि व्यवस्था से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जा सकती है।
200 से अधिक किस्मों के आम बने आकर्षण का केंद्र
मैंगो मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए प्रगतिशील किसानों और बागवानी विशेषज्ञों ने भाग लिया। यहां 200 से अधिक किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में किसान और आगंतुक पहुंचे। मंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और आम की नई किस्मों व उत्पादन तकनीकों की जानकारी ली।
नर्सरी का किया निरीक्षण, पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान श्याम सिंह राणा ने उप-उष्णकटिबंधीय फल केंद्र की नर्सरी का दौरा कर पौधे तैयार करने की प्रक्रिया को समझा। उन्होंने परिसर में पौधारोपण भी किया और लोगों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।
AI और ड्रोन बदलेंगे खेती की तस्वीर
अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि भविष्य की खेती आधुनिक तकनीक पर आधारित होगी। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन और डिजिटल तकनीक किसानों को समय रहते मिट्टी की गुणवत्ता, सिंचाई, मौसम, रोग और बाजार की मांग जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध करा रही हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्ट तकनीकों के इस्तेमाल से खेती की लागत घटेगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में भी सुधार होगा।
बागवानी और प्राकृतिक खेती को मिल रहा बढ़ावा
मंत्री ने बताया कि सरकार किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। नए आम के बाग लगाने पर 42 हजार रुपये प्रति एकड़ तक की सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही आम की फसल को भावांतर भरपाई योजना में भी शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में लाखों एकड़ भूमि प्राकृतिक खेती के लिए पंजीकृत की जा चुकी है और इस दिशा में किसानों को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
देसी गाय आधारित खेती को मिलेगा अतिरिक्त प्रोत्साहन
श्याम सिंह राणा ने बताया कि प्राकृतिक खेती में देसी गाय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार ने जीवामृत और घनजीवामृत तैयार करने के लिए मिलने वाली सहायता राशि बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दी है। इसके अलावा प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले कच्चे माल के भंडारण के लिए किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी दी जा रही है।



