हरियाणा के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा सिख गुरुओं का गौरवशाली इतिहास, मुख्यमंत्री नायब सैनी ने पूरा किया वादा
कक्षा 8 के इतिहास पाठ्यक्रम में शामिल हुए सिख गुरु और बाबा बंदा सिंह बहादुर, विद्यार्थियों को मिलेगी राष्ट्रभक्ति और सेवा भाव की प्रेरणा

चंडीगढ़, 11 जून। हरियाणा सरकार ने विद्यालयी शिक्षा में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कक्षा 8वीं के इतिहास पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं और बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन, संघर्ष और योगदान को शामिल कर दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की घोषणा के अनुरूप यह फैसला लागू किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को देश के गौरवशाली इतिहास और महान विभूतियों के आदर्शों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि नई पीढ़ी को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि ऐसे प्रेरणादायक व्यक्तित्वों की जीवनगाथाओं से भी परिचित कराया जाना चाहिए, जिन्होंने मानवता, न्याय और राष्ट्रहित के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
गुरु तेगबहादुर शहीदी समागम में किया था वादा
मुख्यमंत्री ने गुरु तेगबहादुर जी के 350वें शहीदी समागम के दौरान यह घोषणा की थी कि सिख इतिहास और गुरुओं की शिक्षाओं को विद्यालयी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। अब इस घोषणा को धरातल पर उतारते हुए शिक्षा विभाग ने इतिहास की पुस्तकों में संबंधित अध्याय शामिल कर दिए हैं। इस कदम से छात्र सिख परंपरा, बलिदान, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक समरसता के मूल्यों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
सिख गुरुओं की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी तक सभी गुरुओं ने समाज को समानता, सेवा, करुणा, भाईचारे और मानव कल्याण का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज में नैतिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसे आदर्शों से जोड़ना समय की आवश्यकता है ताकि उनमें जिम्मेदार नागरिकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित हो सके।
बाबा बंदा सिंह बहादुर के संघर्ष से भी परिचित होंगे विद्यार्थी
नई पाठ्य सामग्री में बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन और योगदान को भी शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष करते हुए कमजोर वर्गों को सम्मान और अधिकार दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। उनका जीवन साहस, नेतृत्व क्षमता, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक न्याय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान कर सकता है।
शिक्षा के साथ संस्कार निर्माण पर भी जोर
हरियाणा सरकार का मानना है कि शिक्षा केवल परीक्षा और डिग्री तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और सामाजिक मूल्यों के विकास का माध्यम भी बननी चाहिए। इसी सोच के तहत ऐसे महापुरुषों और राष्ट्रनायकों को पाठ्यक्रम में स्थान दिया जा रहा है, जिनका जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहा है।
क्या होगा प्रभाव?
विद्यार्थियों पर संभावित असर
- सिख इतिहास और भारतीय विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
- विद्यार्थियों में सेवा, त्याग और राष्ट्रभक्ति के मूल्य विकसित होंगे।
- सामाजिक समरसता और भाईचारे की भावना को मजबूती मिलेगी।
- युवा पीढ़ी अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्यों से अधिक जुड़ सकेगी।
सिख समुदाय ने जताया आभार
मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. प्रभलीन सिंह ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह सिख समाज की लंबे समय से चली आ रही भावनात्मक मांग थी। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला सरकार की समावेशी सोच और सभी वर्गों के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण को दर्शाता है।



