सिरसा में 4.5 करोड़ की अफीम बरामदगी मामले में सनसनीखेज खुलासा, ASI बर्खास्त; नशीली खेप में हेराफेरी के आरोप

सिरसा, 13 जून। हरियाणा के सिरसा जिले में करोड़ों रुपये की अफीम बरामदगी से जुड़े मामले में बड़ा खुलासा सामने आया है। पुलिस की आंतरिक जांच में एक पुलिसकर्मी पर बरामद नशीले पदार्थ की मात्रा में कथित हेराफेरी करने के आरोप लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिरसा पुलिस ने डिंग थाना में तैनात एएसआई रणबीर सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले पुलिस ने एक ट्रक की चेसिस से करीब 4.5 करोड़ रुपये मूल्य की अफीम बरामद करने का दावा किया था। यह कार्रवाई जिले में नशा तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता मानी गई थी। हालांकि बाद में मिली शिकायत ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
सूत्रों के मुताबिक सिरसा पुलिस अधीक्षक को शिकायत मिली थी कि बरामद अफीम की वास्तविक मात्रा और रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा में अंतर हो सकता है। इसके बाद मामले की गोपनीय जांच करवाई गई। प्राथमिक जांच में सामने आया कि कार्रवाई के दौरान बरामद अफीम में से केवल 88 किलो 970 ग्राम मात्रा ही आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्शाई गई। आरोप है कि शेष मात्रा को कथित रूप से खुर्द-बुर्द कर दिया गया। जांच में डिंग थाना के एएसआई रणबीर सिंह की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए तत्काल बर्खास्तगी के आदेश जारी किए गए।
आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ FIR दर्ज
पुलिस विभाग ने आरोपी एएसआई के खिलाफ सिरसा के सिविल लाइन थाना में आपराधिक मामला दर्ज कराया है। साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच एंटी नारकोटिक्स ब्यूरो (ANB) को सौंप दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि बरामद नशीली खेप में वास्तव में कितनी मात्रा गायब हुई और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भी कोई भूमिका रही है।
कई सवालों के जवाब तलाश रही जांच एजेंसी
मामले के सामने आने के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल उठ खड़े हुए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित रूप से गायब की गई अफीम का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या आरोपी पुलिसकर्मी का किसी नशा तस्कर गिरोह से संबंध था या फिर वह व्यक्तिगत लाभ के लिए यह कार्रवाई कर रहा था।
अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जानकारी के अनुसार बरामदगी के दौरान पुलिस टीम के साथ राजपत्रित अधिकारी के रूप में डीएसपी स्तर के अधिकारी भी मौजूद थे। ऐसे में यह भी जांच की जा रही है कि बरामदगी और जब्ती प्रक्रिया के दौरान निगरानी व्यवस्था में कोई चूक तो नहीं हुई। जांच एजेंसियां उस दिन कार्रवाई में शामिल सभी पुलिसकर्मियों से पूछताछ कर सकती हैं।
ट्रक की बॉडी और बरामदगी प्रक्रिया की होगी पड़ताल
एंटी नारकोटिक्स ब्यूरो अब ट्रक की चेसिस में किए गए बदलाव, नशीले पदार्थ को छिपाने के तरीके और बरामदगी के बाद उसकी सुरक्षा प्रक्रिया की भी जांच करेगा। इससे पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।



