Chandigarh

हरियाणा में कल से शुरू होगा मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान, BJP सबसे आगे; JJP-BSP ने नहीं भेजा एक भी BLA आवेदन

20,629 पोलिंग बूथों पर चलेगी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया, राजनीतिक दलों की तैयारियों पर नजर

चंडीगढ़। हरियाणा में मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने के लिए सोमवार से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान शुरू होने जा रहा है। अभियान से पहले राज्य निर्वाचन विभाग ने तैयारियों का ब्यौरा साझा करते हुए बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों से बूथ लेवल एजेंट (BLA-2) नियुक्त करने के लिए आवेदन प्राप्त हो रहे हैं।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए. श्रीनिवास ने बताया कि अब तक सबसे अधिक आवेदन भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्राप्त हुए हैं। इसके बाद कांग्रेस का स्थान है। निर्वाचन विभाग का लक्ष्य है कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहें ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद तरीके से संपन्न हो सके।

BJP ने भेजे सबसे ज्यादा आवेदन

निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के अनुसार:

  • भाजपा : 15,808 BLA-2 आवेदन
  • कांग्रेस : 12,858 आवेदन
  • कम्युनिस्ट पार्टी : 270 आवेदन
  • इनेलो : 217 आवेदन
  • जजपा : 0 आवेदन
  • बसपा : 0 आवेदन

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रमुख दलों ने पुनरीक्षण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी दिखाई है, जबकि कुछ दलों की ओर से अभी तक कोई आवेदन नहीं मिला है।

20 हजार से अधिक बूथों पर होगी निगरानी

हरियाणा में कुल 20,629 पोलिंग बूथ हैं। ऐसे में अभी भी बड़ी संख्या में बूथ ऐसे हैं जहां विभिन्न दलों के एजेंट नियुक्त होने बाकी हैं। निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि आवेदन जमा करने की प्रक्रिया जारी है और आगामी दिनों में संख्या बढ़ सकती है।

क्या होता है BLA-2?

बूथ लेवल एजेंट (BLA-2) राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि होते हैं, जो मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की निगरानी करते हैं। वे नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम संशोधन, स्थानांतरण और आपत्तियों जैसी प्रक्रियाओं पर नजर रखते हैं तथा निर्वाचन विभाग के साथ समन्वय बनाते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है SIR अभियान?

विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना और पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल करना है। इसके माध्यम से:

  • नए मतदाताओं का पंजीकरण होगा।
  • मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नामों की समीक्षा होगी।
  • मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
  • चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

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